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रोना आँखों के लिए अच्छा है या बुरा?(Is crying good or bad for the eyes?)In Hindi

22/09/2024 by admin Leave a Comment

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रोना आँखो के लिए अच्छा है या बुरा? (Crying is good or bad for the eyes)

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम आँखों से जुडी कुछ खास बातो के बारे में जानकारी सांजा करने वाले है। जैसे – रोना आँखों के लिए अच्छा होता है या बुरा? (Crying is good or bad for the eyes)

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हमारे द्वारा दिनभर में किया गया छोटे से छोटा कार्य भी शरीर पर असर डालता है| आप क्या खाते हैं, कितने घंटे सोते हैं, और यहां तक कि आप कितना हसते है और कितना रोते है।

सभी जानतें है कि व्यायाम करने का हमारे शरीर पर क्या असर होता है, और ये भी जानते है की हसना सेहत के लिए अच्छा होता है। लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात से वाकिफ होते हैं कि रोने से भी शरीर पर असर होता है|

 

आंसुओं का सिक्रिशन कितने प्रकार का होता है?

 

आंसू हमारे शरीर की रक्षात्मक प्रक्रिया हैं| आंसुओं का सिक्रिशन यानी स्त्राव दो प्रकार का होता है –

 

1. बेसिल सिक्रीशन।

यह आंसू आंखों से बाहर नहीं आते है, बल्कि आंखो में ही रहकर उसकी नमी बनाए रखने में सहायक होते हैं|

 

2. रिफ्लेक्स सिक्रिशन।

यानी प्रतिक्रियात्मक स्त्राव, यह भावनात्मक भी हो सकते है या आंखों में कुछ चले जाने या चुभने से भी यह आंसू निकल आते हैं|

आंसू क्यों जरूरी है?

हंसना जहां सेहत के लिए अच्छा है वहीं रोना भी सेहत के लिए बुरा नहीं है। जिस तरह हंसने के फायदे होते हैं उसी तरह रोने के भी फायदे होते हैं। चाहे आप फिल्म देखते हुए रो रहे हों या प्याज काट रहे हों, आपकी आंखों में आंसू आना चाहिए।
यह कॉर्निया को साफ बनाए रखनें मे मदद करता हैं| आंसू न आने से आंखों में सूखापन आ जाता है | इससे आंखों में दर्द, चुभन,जलन के साथ कॉर्निया की स्पष्टता पर असर पड़ता है और इससे दृष्टि भी बाधित हो सकती है| आंसू ल्यूब्रिकेटर होते हैं|
आंसू नजर को स्पष्ट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, यह आंखो को साफ रखते हैं| आंखों में नमी बनी रहती है, जिससे आंखों में जलन की आशंका कम हो जाती है|
आंसूओं से आंखों के सूखने की परेशानी नहीं होती, क्योंकि सूखापन रोशनी को सदा के लिए खत्म कर सकता है|एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो नवजात सोने से पहले रोते हैं उनकी नींद लम्बी और बेहतर होती है|

 

रोने से होते है ये फायदे :-

आंसू भी तिन प्रकार के होते है चिंतनशील, सतत और भावनात्मक। क्या आपको पता है की सिर्फ इन्सान ही भावनात्मक तरीके से रो सकते है। भावनात्मक होके रोना आपके सेहत के लिए बहोत फायदेमंद है।

 

रोने से आपका मुड अच्छा होता है।

हाल ही में नीदरलैंड्स में हुए एक अध्ययन में कुछ लोगों को सैड मूवीज दिखाई गईं। कुछ लोग भावनात्मक रूप से प्रभावित नहीं हुए और कुछ लोग बुरी तरह रो पड़े। फिल्म देखने के बाद रोने वाले और न रोने वालों को अलग कर दिया गया। हालांकि, जो नहीं रोए वे 20 मिनट के भीतर सामान्य हो गए, और जो रोए वे 90 मिनट के बाद उन लोगों की तुलना में बेहतर महसूस करते थे।

 

रोने से तनाव दूर होता है।

रोने के बाद हम बेहतर महसूस करते हैं क्योंकि यह तनाव के दौरान पैदा होने वाले रसायनों को छोड़ता है। हम नहीं जानते कि ये रसायन क्या हैं, लेकिन आँसू में ACTH होता है जो तनाव के दौरान बढ़ जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि हम कभी-कभी रोएं। इससे तनाव कम होता है और दिल और दिमाग को कोई नुकसान नहीं होता है। हमें अपने बच्चों को रोने से नहीं रोकना चाहिए। हमें खुशी होनी चाहिए कि उनमें यह क्षमता है।

 

आंसू से होती है आँखे सुरक्षित।

बिना भावुक हुए रोने के भी स्वास्थ्य को लाभ होते हैं। जब आप एक प्याज काटते हैं, तो प्याज से एक रसायन निकलता है और आंख की सतह तक पहुंचता है। इससे सल्फ्यूरिक अम्ल बनता है। इससे छुटकारा पाने के लिए लैक्रिमल ग्रंथियां आंसू का स्राव करती हैं, जो आंखों तक पहुंचने वाले रसायनों को धो देती हैं। आंसुओं में लाइसोजाइम भी होता है जो एंटीबैक्टीरियल और एंटी वायरल होता है। ग्लूकोज आंखों की सतह की कोशिकाओं को मजबूत करता है।

 

आँसू हमारी नाक की रक्षा करते है।

आंसू शरीर के अंदर लैक्रिमल डक्ट्स के जरिए नासिका तक पहुंचते हैं, जिससे नाक में जमा गंदगी साफ हो जाती है। रोने के दौरान अक्सर नाक बहने लगती है, इसके पीछे यही कारण होता है। रोने से नाक में जमा बैक्टीरिया और गंदगी बाहर निकल जाती है।
महिलाएं महीने में औसतन 5.3 बार रोती हैं जबकि पुरुष औसतन केवल 1.3 बार रोते हैं। इस अंतर का कारण यह है कि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन होता है जबकि महिलाओं में प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन होता है जो रोने को प्रेरित करता है।

 

अंतिम शब्द (Last word ) :-

दोस्तों, इस लेख में हमने रोना आँखो के लिए अच्छा है या बुरा (Crying is good or bad for the eyes) इसके बारे में जानकारी दी है| यदि आपको इस लेख से संबंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमे कमेंट करके पूछ सकते है|
पूछे गये सवाल :-
१. बहुत ज्यादा रोने से क्या होता है?
रोने से सल्फ्यूरिक अम्ल बनता है। इससे छुटकारा पाने के लिए लैक्रिमल ग्रंथियां आंसू का स्राव करती हैं, जो आंखों तक पहुंचने वाले रसायनों को धो देती हैं।
२. हम डिप्रेशन में क्यों रोते हैं?
डिप्रेशन लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकता है और लोगों में कई तरह के लक्षण हो सकते हैं। लोग डिप्रेशन के कारण उदास, निराश महसूस करते हैं। और इस वजह से हमें रोना पड़ता है, और रोने के कुछ देर बाद ही हमें अच्छा महसूस होता है।
3. रोने से शरीर में क्या होता है?
दर्द से राहत के साथ-साथ रोने से आपका मूड भी अच्छा होता है। जब आप रोते हैं या आहें भरते हैं तो ठंडी हवा का कुछ झोंका शरीर के अंदर चला जाता है, जो मस्तिष्क के तापमान को कम करता है और शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करता है।
४. हम क्यों रोते हैं?
हम घर पर अकेले हैं या अपनों से दूर हैं।
हम रोते हैं जब उस व्यक्ति के साथ कुछ बुरा होता है जिसके साथ हम भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं।
प्रेमी से रिश्ता टूटने और प्यार में पड़ने के बाद भी हमारी आंखों से आंसू निकल आते हैं।
हम रोते हैं जब हम डरते हैं, घायल होते हैं और बहुत खुश होते हैं।

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